आज का दिन, बहुत से हिंदी ब्लॉगर्स के लिए, ईनाम का दिन है, उनके लिए खुशी का दिन है। वे तमाम ब्लॉगर्स हमारा ही अंग हैं। जब यह दिन उनके लिए खुशी का दिन है तो यह हमारे लिए भी खुशी का दिन है। यह दिन एक परिकल्पना और एक सपने के साकार होने का दिन है। इस सपने को विशेष रूप से साकार किया है श्री रवीन्द्र प्रभात जी ने और श्री अविनाश वाचस्पति जी ने और बहुत से दीगर ब्लॉगर्स ने भी इस मुहिम में उनका साथ दिया है, इसके लिए ईनामयाफ़्ता ब्लॉगर्स के साथ हम भी उनके शुक्रगुज़ार हैं।
आज का सम्मेलन बिना किसी विघ्न के सकुशल संपन्न हो, ऐसी कामना हम कर ही चुके हैं लिहाज़ा आज हम केवल प्यार-मुहब्बत बढ़ाने वाली बातें ही करेंगे ताकि आयोजकों का उत्साह बना रहे। इसके अलावा किसी प्रकार का सहयोग यदि वे हमसे चाहें तो हम उसके लिए भी हाज़िर हैं।
किसी भी बड़े सम्मेलन का आयोजन आसान नहीं होता। यह बात भी नज़र में रहनी चाहिए। इसे एक स्वस्थ प्रतियोगिता के रूप में लिया जाए तो कई समस्याओं का सिर क़लम हो जाएगा।
ऐसा इसलिए कि हम जिसे प्यार करते हैं, जिसे सम्मान देते हैं, जो कोई उन्हें प्यार और सम्मान देता है, उसे भी प्यार और सम्मान ही दिया जाता है। इस सम्मेलन में ऐसी एक नहीं बल्कि कई हस्तियां ऐसी हैं जिन्हें प्यार और सम्मान देते हैं।
ऐसा करना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि लोगों को पता चल सके कि हम सब एक हैं और कोई भी व्यक्तिगत राय सामूहिक प्रेम से ऊपर नहीं होनी चाहिए। हरेक बात की एक मर्यादा और एक समय निश्चित है और आज का समय केवल प्यार, शुभकामना और बधाईयों का है। लिहाज़ा हमारी ओर से सभी जनों को भरपूर प्यार, शुभकामना और ढेर सारी बधाईयां।
इस अवसर पर हिंदी ब्लॉगर्स की जो पुस्तकें आज ब्लॉग जगत के सुपुर्द की जाएंगी, वे लोगों के लिए मुफ़ीद हों, इसके लिए भी हम अपने मालिक से दुआ करते हैं।
ईनाम छोटा हो या बड़ा, देता मालिक ही है, चाहे हाथ किसी का भी हो। वह मालिक किसी की मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। एक दिन वह भी आने वाला है जबकि वह मालिक खुद अपने बंदों को ईनाम देगा। उस दिन भी वे लोग अपने मालिक से ईनाम पाने वाले बनें जो कि आज ईनाम पा रहे हैं, ऐसी हमारी दुआ है। मालिक हर चीज़ से बड़ा है और उसका ईनाम भी सबसे बड़ा ईनाम है। छोटा ईनाम हमारे लिए बड़े ईनाम तक पहुंचने का ज़रिया बन जाए।
आमीन !
सुम्मा आमीन !!