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Friday, December 3, 2010

Prejudice मेरे बारे में बदगुमानियों के पीछे एक बड़ी वजह आपकी ज़हनियत भी है। क्या आप इसे स्वीकार करते हैं ?

बहन अपर्णा "पलाश" बेवजह मुझ से बदगुमान क्यों ?
मैं अब तक तक़रीबन 200 से ज़्यादा लेख लिख चुका हूं और कमेंट्स की तादाद याद नहीं है और न ही अब उन्हें काउंट किया जा सकता है। इन सबमें मैंने यही लिखा है कि ईश्वर एक है और उसका धर्म भी एक ही है। जो लोग ऐसा नहीं मानते, उन्होंने मुझ पर ऐतराज़ किए। मैंने उनके ऐतराज़ का खोखलापन साबित कर दिया, दलील से। तब उन्होंने मेरी नीयत पर शक ज़ाहिर किया। कहते हैं कि शक का इलाज हकीम लुक़मान के पास भी नहीं था। हां, तब नहीं था लेकिन अब है। कैसे है और किसके पास है, यह एक मुकम्मल और अलहदा पोस्ट का विषय है।
ख़ैर, शक और बदगुमानी अगर ज़हन में लेकर आप किसी लेख को पढ़ते हैं तो यह लेख और लेखक दोनों के साथ अन्याय करना है।
बहन पलाश ने मेरे साथ ऐसा ही अन्याय किया है। आप खुद देख सकते हैं। नीचे आप लिंक पर जाकर पहले मेरा लेख देखिए और फिर उनकी टिप्पणी और फिर मेरा जवाब जो मैंने उन्हें दिया है।
मेरे बारे में बदगुमानियों के पीछे एक बड़ी वजह आपकी ज़हनियत भी है।
क्या आप इसे स्वीकार करते हैं ?

ईश्वर का ही नाम अल्लाह है .


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अपर्णा "पलाश" said...
आप जिस उपनिषद की बात कर रहे है , कृपया उसके रचयिता का नम भी बता दीजिये ।
और रही बात ईशवर और अल्लाह के अलग होने की , तो हो सकता है आप ने दोनो को साक्षात अलग अलग देखा हो , और यह आपका परम सौभाग्य रहा होगा ।
हो सकता है । आपका प्रयास सफल हो हम तो यही दुआ करते है । आप अपने जीवन में अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने में सफल हो जायें क्योकिं हमे तो इसकी तनिक भी जरूरत नही। हम सूरज को आइना नही दिखाते । क्या नवीन है और क्या पुरातन शायद यह जानने के लिये आपको अभी और अध्धययन की आवश्यकता है ।

November 24, 2010 8:13 PM
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मेरा जवाब जो मैंने उन्हें दिया है
@ सिस्टर पलाश ! मैंने कहाँ लिखा है कि अल्लाह और ईश्वर दो हैं ?
इसका मतलब यह हुआ कि आपने पोस्ट को ध्यान से नहीं पढ़ा है .
कृपया दोबारा पढ़ें .
किसी तत्वपूर्ण लेख पर केवल सरसरी नज़र डालकर टिपण्णी कर देना लेख और लेखक के साथ अन्याय करना भी है
और खुद को नादान ज़ाहिर करना भी , और आप ऐसी नहीं हैं .
प्लीज़ लेख दोबारा पढ़ें .