कुछ लोग हालात के तहत मुजरिम बन जाते हैं जबकि कुछ शौक़िया जुर्म करते हैं । कुछ मजरिम एक दो क्राइम करके रूक जाते हैं जबकि कुछ आदी मुजरिम होते हैं । ऐसे ही माँगने वाले भी होते हैं । कोई ज़रूरत में माँगता है और कुछ भिखारी पेशेवर होते हैं । औरतें भी कभी कभार पड़ोसन से चीनी आदि माँग लेती हैं और बाज़ार से आने पर लौटा भी देती हैं ।
ऐसे ही आजकल एक चोचला चल रहा है सम्मान पाने का । ब्लॉग जगत में सम्मान लेना देना आजकल बाक़ायदा एक पेशे की शक्ल बनता जा रहा है । आज फिर कमल 'सवेरा' जी कहीं सम्मानित होते हुए नज़र आ गए । जैसे आदमी खाना खाने के बाद भी एक आध पान वान चबा लेता है ज़ायक़ा संवारने के लिए। ऐसे ही अभी वह दिल्ली में सम्मानित होकर लौटे हैं लेकिन एक छोटा सा सम्मान कल यू. पी. में चटख़ा डाला और ऐसे ही नहीं बाक़ायदा गले में फूल मालाएं भी टंगा रखी थीं ।
सच है जिसे सम्मानित होने की लत पड़ जाए , उसे फिर इस बात की भी परवाह नहीं रहती कि उसे इस हाल में देख कर लोग कितना हंसेगे ?
अब ये साहब इस उधार के सम्मान के बदले पत्रिका वाले को सम्मानित कर डालेंगे । आज पोस्ट 'मिस्टर नाइस' ने लगाई है और तब ये अपनी डॉट कॉम पर चिपका देंगे ।
बिल्कुल उधार की चीनी की तरह !