आ बैल मुझे मार
विधान सभा चुनाव क़रीब हैं। हमारी मुख्यमंत्री बहन सुश्री मायावती जी एक भ्रष्टाचार और भयमुक्त समाज देने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी हैं। अपने वादे को पूरा करने के लिए वे कई ऐसे विधायकों तक को जेल भेज चुकी हैं जिन्होंने अपने बाहुबल का और अपने धन का इस्तेमाल लोगों को धमकाने, सताने या उन पर मुक़द्दमा क़ायम कराने में किया है। ‘आदर्श घोटाला‘ बेशक दूसरे प्रदेश में हुआ है लेकिन यह भी सच है कि किसी भी प्रदेश का कोई भी नगर आज घोटालों से बचा हुआ नहीं है। मायावती जी का संबंध बादलपुर से है जो कि नोएडा के बहुत क़रीब है। नोएडा भी मुख्यमंत्री साहिबा की एक महत्वाकांक्षी योजना का अंग है। इसमें वे किसी भी प्रकार की अनियमितता देखना नहीं चाहती हैं।
आज मंहगाई अपने चरम पर है। हरेक छोटा-बड़ा सरकारी कर्मचारी जो ईमानदार है और ‘केवल वेतन‘ पर ही जीवित है। उसके लिए अपने ख़र्च के लिए अपना वेतन भी कम पड़ रहा है। यह एक सच है जिसे सब जानते हैं। ऐसे कठिन समय में भी जनाब सतीश सक्सेना जी लोगों को बतौर ईनाम कई लाख रूपया बांटने के लिए तत्पर हैं। वे बांट सकते हैं क्योंकि उनके पल्ले माल है। लेकिन इतना माल आया कहां से ?
हम तो ख़ैर यह नहीं पूछेंगे लेकिन ‘विजिलेंस‘ वाले ज़रूर पूछेंगे। मोबाइल के एसएमएस तक पर सरकार की कड़ी नज़र है। हरेक ईमेल की छानबीन की जाती है। ख़ुफ़िया विभाग की कई शाखाओं की नज़र इंटरनेट यूज़र्स पर हर दम रहती है। मामूली बातों को वे जानबूझकर टालते हैं लेकिन इससे कोई भी आदमी यह न समझे कि उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। ऐसा सोचना बेबक़ूफ़ी होगा और घातक भी। अगर किसी की नज़र जनाब सतीश सक्सेना जी के अभियान पर पड़ गई और उनका ध्यान इस पर भी चला गया या फिर दिला दिया गया कि ये जनाब एक सरकारी कर्मचारी भी हैं तो कई तरह की एजेंसियों की पकड़ में आ जाने की संभावना है। हालांकि आम तौर पर सरकारी कर्मचारी अपनी कोठी से लेकर कुतिया तक अपनी पत्नी के नाम से ख़रीदता है ताकि किसी रोज़ अगर उसकी जांच होने लगे तो वह अपना दामन पाक-साफ़ दिखा सके लेकिन जब जांच हुआ करती है तो फिर कोई हीला-हवाला काम नहीं आया करता। इस सूचना के अधिकार ने आम जनता को एक अधिकार ही नहीं बल्कि बेईमान भ्रष्ट लोगों के खि़लाफ़ एक मज़बूत हथियार भी दे दिया है। मा़त्र दस रूपये का पोस्टल आर्डर लगाकर कोई भी आदमी किसी भी सरकारी कर्मचारी का पूरा शजरा जान सकता है और बिना किसी 5 हज़ार रूपये के ही मुक़द्दमा क़ायम हो जाता है क्योंकि तब वादी सरकार हुआ करती है। जनाब दिनेश राय द्विवेदी जी से इस मामले में विधिक सलाह ली जा सकती है।
अगर नोएडा जैसी जगह में कोई भ्रष्टाचार करता हुआ मिलना तो दूर वहां कोई सरकारी कर्मचारी ‘उत्पात‘ मचाता हुआ भी दिख गया तो आदरणीया मायावती जी को भी ख़बर करने की ज़रूरत न पड़ेगी बल्कि जनाब नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी साहब ही उसे एटा-गोंडा की तरफ़ चलता कर देंगे, तुरंत। वहां एक पैसे की आमदनी ‘अलग से‘ होगी नहीं और जो पिछला जमा है, उसमें से भी काम आ जाएगा। संभल वाले जनाब शफ़ीकुर्रहमान बर्क़ साहब भी ऐसे ‘उत्पात‘ को हरगिज़ माफ़ नहीं करेंगे। आपको पता ही होगा कि पूरी बसपा में वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो बहन जी के साथ मीटिंग में कुर्सी पर बैठते हैं।
हमारी सलाह तो यही है कि अगर आपने दौलत किसी तरह कमा भी ली है तो इसे यूं ज़ाहिर करते फिरना ठीक नहीं है। किसी की नज़र लग गई या किसी की सरकारी-ग़ैर सरकारी नज़र पड़ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। आप जिस इलाक़े में रहते हैं वहां हरेक आदमी नरेन्द्र भाटी की तरह शरीफ़ नहीं है। वहां माफ़िया भी हैं और वे माफियां भी मंगवा देते हैं। वे यारों के यार टाइप के लोग हैं। हिंदू-मुस्लिम का भेद इन लोगों में कभी हुआ नहीं करता।
क्यों ख़ामख्वाह किसी को अपने पीछे लगाते हो ?
चैन से अपने बच्चे ब्याह लीजिए। हमारी सलाह तो यही है। बाक़ी आपकी मर्ज़ी।
इस पोस्ट को मैं आपके लिए और ब्लाग जगत की स्वतंत्रता के लिए हितकर नहीं मानता। जिन लोगों ने याकूब कुरैशी द्वारा ईनाम घोषित करने की निंदा की थी, उन्हें चाहिए कि वे सतीश जी की इस टुच्ची और निहायत घटिया हरकत का भी विरोध करें, अगर वे बुद्विजीवी हैं तो।
उनकी इन्हीं घटिया हरकतों के कारण आज ब्लागजगत में गुट और धड़े बने हुए हैं। ब्लागिंग के बेहतर भविष्य के लिए सतीश जी को एक डॉन की भांति आचरण करने से रोका जाना चाहिए।
मैं कहता हूं सच को सच और इतना दम यहां हरेक में है नहीं।
आपके हित के लिए जो सूचना और चेतावनी मैं आपको दे सकता था, वह आपको दे दी है। यह पोस्ट आने वाले समय में आपके गले का फंदा ही साबित होगी, ऐसी संभावना साफ़ नज़र आ रही है।
आप सदा कुशलता से रहें, ऐसी हम कामना करते हैं।
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http://satish-saxena.blogspot.com/2011/01/blog-post_17.html

