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Wednesday, July 21, 2010

The right view about God विष्णु अर्थात पालनहार तो सदा से जाग रहा है लेकिन लोगों के ज्ञान चक्षु कब खुलेंगे ? - Anwer Jamal

लोग कह रहे हैं कि विष्णु जी सो गये, अख़बार लिख रहे कि दुनिया को पालने वाला पाताल लोक के राजा के महल के गेट पर जाकर चार माह के लिये सो गया। जबकि मैं देख रहा हूं कि दुनिया ठीक ठाक चल रही है। हवा भी चल रही है और बादल भी बरस रहे हैं। सूरज भी अपना ताप दे रहा है और पौधे भी लहलहा रहे हैं बल्कि पहले से बेहतर लहलहा रहे हैं।

क्या एअर ट्रैफ़िक कंट्रोलर अपनी सीट पर सो जाए तो प्लेन आकाश में उड़ पाएंगे या ज़मीन पर सुरक्षित उतर पाएंगे ?
हम सुरक्षित हैं , बच्चे जन्म ले रहे हैं मांओं की छातियों से अमृत मासूमों के बदन को तृप्त कर रहा है। मौसम युवाओं को हिला मिलाकर उनके दायित्व की तरफ़ खींच रहा है। धरती धुल रही है, प्रकृति निखर रही है, सुहागिनों के चेहरों की ताज़गी बढ़ती जा रही है। अच्छी फ़सल की उम्मीदें जाग रही हैं। सभी काम अपने ढर्रे पर बिल्कुल पहले की तरह चल रहे हैं।
इसका मतलब यह है कि जो मालिक सृष्टि को चला रहा है जैसा वह पहले था वैसा ही आज भी है। उसे थकान ही नहीं होती तो उसे नींद की क्या ज़रूरत और वह भी पाताल लोक में जाकर ?
पाताल लोक को वैदिक विद्वान अमरीका भी कहते हैं।
जिस जाति ने कभी दुनिया को अजन्मे और अविनाशी ईश्वर के बारे में बताया जगाया था वह आज इस दशा को पहुंच गई है कि वह कह रही है कि विष्णु जी सो गये।
विष्णु अर्थात पालनहार तो सदा से जाग रहा है लेकिन लोगों के ज्ञान चक्षु कब खुलेंगे ?
सत्य को कब पहचानेंगे और अंधविश्वास से मुक्त होकर सत्य पर कब विश्वास करेंगे ?