'साथ ही मैं इस निष्कर्ष पर भी पहुंचा हूँ कि परिकल्पना सम्मान-२०११ के लिए पूर्व की भांति उन्ही रचनाकारों में से ५१ सर्जकों का चयन किया जाए जो ब्लॉगोत्सव-२०११ में हिस्सा लेंगे , यानी ब्लॉगोत्सव में हिस्सा न लेने वाले रचनाकार इस बार भी इस सम्मान से वंचित रहेंगे !'
-श्री रवींद्र प्रभात
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| डा. अनवर जमाल और BK संगीता जी |
आज हमारी नज़र श्री रवींद्र प्रभात जी के लेख पर पड़ी तो उसमें उपरोक्त पंक्तियां पढ़ने को मिलीं। इससे पता यह चला कि जो भी ब्लॉगर श्री रवींद्र जी को लेख नहीं भेजेगा, उसे वह सम्मान से वंचित कर देंगे जैसे कि वह ब्लॉगोत्सव 2010 में बहुत से ब्लॉगर्स को सम्मान से वंचित कर ही चुके हैं। इस तरह तो यह ब्लॉगोत्सव अधिकतर ब्लॉगर्स को सम्मान से वंचित ही करता रहेगा।
बिहारी बंधु ! हिंदी ब्लॉगर्स को क्यों सम्मान से वंचित करने पर तुले हुए हो ?
अगर सब इकठ्ठा हो गए तो आप अपमान तक से वंचित हो जाएंगे और एक ब्लॉगर यहां ऐसा भी है जो किसी के इकठ्ठा होने की इंतज़ार नहीं करता बल्कि अकेला ही अपमान की कालिमा का रेनबो सा कलंकित व्यक्ति के चारों ओर फैला देता है।
लेकिन आजकल हम इन चक्करों में पड़ना नहीं चाहते हैं क्योंकि हम ‘हूरों की दुनिया‘ से ताज़ा ताज़ा लौटे हैं और हमने वहां ‘ओम शांति‘ का पाठ भी किया था, ध्यान भी किया था और अपने स्वागत गान में भी यही सुना था।
ऐसे शांतिकाल में हम तो बस यह सलाह देना चाहेंगे कि
