Thursday, June 2, 2011

25,000 houries 'हूरों की दुनिया में' अनवर जमाल का स्वागत हुआ गुलाब के फूलों से

स्वागत गान

खुले मन से होता यहां सबका स्वागत
नहीं ग़ैर कोई, ये अपनों की दुनिया
यहां आके जन्नत का कर लो नज़ारा
ये हूरों की दुनिया, फ़रिश्तों की दुनिया

करो आत्मचिंतन करो योग साधना
कि तन होगा निर्मल, कि मन होगा पावन
ये जीवन हो दुनिया की सेवा में अर्पण
तो हो जाए अपनी ये ग़ैरों की दुनिया
खुले मन से...

कहो ओम शांति सुनो ओम शांति
लिखो ओम शांति, पढ़ो ओम शांति
ये है मंत्र ऐसा कि जपने से जिसके 
सदा दूर रहती है कष्टों की दुनिया
खुले मन से...

निराधार मन को आधार है शिव का
ये सृष्टि है शिव की, ये संसार शिव का
बराबर है सबके लिए प्यार शिव का
ये दुनिया है शिव जी के बच्चों की दुनिया

खुले मन से होता, यहां सबका स्वागत
नहीं ग़ैर कोई, ये अपनों की दुनिया
यहां आके जन्नत का कर लो नज़ारा
ये हूरों की दुनिया, फ़रिश्तों की दुनिया

BK राजकुमारी जी, डा. अनवर जमाल, पार्वती जी, संगीता जी, पारूल जी व अन्य

फूल भेंट करते हुए बीके हरिदत्त शर्मा जी

तल्लीन होकर सुनते हुए मुस्लिम विद्वान

संगीता जी जानकारी देते हुए

सेंटर के हॉल का एक दृश्य

सिस्टम पर यह स्वागत गान ब्रह्माकुमारी पारूल जी ने हमारे सम्मान हम सबको सुनाया। सफ़ेद पोशाक में सभी ब्रह्माकुमारियां एक अद्भुत प्रेम और शांति का अनुभव हम सभी को करा रही थीं। उनकी बातों का केन्द्र भी शांति था। यह घटना रियासत रामपुर की घटना है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कल दिनांक 1 जून 2011 को बुधवार के दिन मुस्लिम विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की रामपुर शाखा पर पहुंचा। इस ग्रुप में हरेक उम्र के मर्द-औरत और लड़के-लड़कियां थे। इनकी तादाद 70 से ज़्यादा थी। इस मुलाक़ात का मक़सद यह था कि सभी मत-संप्रदायों के विद्वान अपने ज़िम्मेदारों की मौजूदगी में समय-समय पर आपस में मिलते रहें तो सभी को एक दूसरे की मान्यताओं के बारे में सही जानकारी मिलती रहेगी और ग़लतफ़हमियां दूर होती रहेंगी। यह प्रक्रिया समाज के सदस्यों को प्रबुद्ध और सहिष्णु भी बनाती है और समाज के साझा हितों के लिए एक दूसरे का सहयोगी भी बनाती है। 
सेंटर के गेट पर सबसे पहले बीके श्री हरिदत्त शर्मा जी ने स्वागत किया और सभी लोगों को गुलाब के फूल भेंट करके अपने प्यार का इज़्हार किया। उसके बाद सबसे पहले हमें एक मधुर स्वर में स्वागत गान सुनाया गया। उसके बाद हमें संस्था के उद्देश्य और उसके कार्यक्रमों और सेवाओं की जानकारी दी गई। बीके पारूल जी और बीके पार्वती जी विशेषकर हमारे लिए बरेली से पधारी थीं। रामपुर की शाखा का कार्यभार ब्रह्माकुमारी संगीता जी संभाले हुए हैं। तीनों विदुषियों ने बारी-बारी से दादा लेखराज जी द्वारा आरंभ किए गए इस मिशन की मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया गया। सबके बाद प्रश्नोत्तर कार्यक्रम हुआ और इसी दरम्यान हल्का सा नाश्ता भी हम सभी को प्रेमपूर्वक भेंट किया गया। 
उन्होंने हमसे क्या कहा और हमने उन्हें क्या बताया ?
अगर इसे लिखना शुरू किया जाए तो इसमें 10 दिन आराम से लग जाएंगे। 
बहरहाल उन्होंने हमसे कहा कि आप हमारे हैडक्वार्टर माउंट आबू पधारें। अब जल्द ही 100 मुस्लिम विद्वानों का एक डेलीगेशन लेकर हम जाएंगे माउंट आबू। इस संस्था में ब्रह्माकुमारियों की कुल तादाद 25,000 है। जो कि दुनिया भर के 137 देशों में राजयोग की शिक्षा दे रही हैं। सभी अनुशासित हैं और साधना व संयम का एक अनोखा नमूना पेश कर रही हैं। ये सभी अविवाहित ही रहती हैं। इनकी वाणी मधुर और विचार स्पष्ट होते हैं। इनके यहां वाक़ई सबका स्वागत होता है और अच्छे तरीक़े से होता है। इनके साथ गुज़रे हुए पलों को यादगार पलों में शुमार किया जाएगा। 
यह एक संक्षिप्त रिपोर्ट है ताकि हमारे प्यारे जान सकें कि हम कब कहां थे और क्या कर रहे थे ?
इसी मक़सद से मोबाइल द्वारा कुछ फ़ोटो भी लिए गए और अब आपके सामने पेश किए जाते हैं।

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

kamal ho gaya.kuchh samjh me nahi aaya ki kya ho gaya?

Bhushan said...

बहुत अच्छा लगा यह पढ़ कर. इस मिशन ने मन और विचार प्रबंधन के मॉड्यूल तैयार किए हैं जो उपयोगी हैं.

शब्दावली और बाहरी आचार-व्यवहार अलग दिखते हैं लेकिन सभी धर्मों के मूल में मानवीय प्रेम प्रमुख है. आपका आलेख इस बात को प्रमाणित करता है.

रश्मि प्रभा... said...

bahut prabhawshali laga sabkuch dekhker aur padhker .... shubhkamnayen

शालिनी कौशिक said...

man gaye anwar jamal ji aapka bhavya swagat hua aur aapne bhi bakhoobi apni post ke jariye unka dhanyawad kiya.

अमीत तोमर said...

bhoot ache bhai ji aapne to vakai me dikha diya ki ham sab ek hen kash sabhi bhartiye ye baat smaj le to apna desh bharat ek khushal desh hoga kabhi dhram ke nam pr koi dnga nhi sabhi premse rahenge

Rashid said...

anwar bhai aap ka baat kehne ka andaz karooron me ek he . I m really impresed . Keep it up

Kajal Kumar said...

बहुत अच्छा लगा यह पढ़कर.
संपर्कों से दूरियां मिटती ही नहीं, बनने ही नहीं पातीं.