Monday, June 13, 2011

हिंदी ब्लॉगिंग का स्तर गिरा रही है हमारी वाणी , हम तो चले और अब जो जी में आए करो बाबा !!! - Dr. Anwer Jamal

हमारी वाणी पत्रिका को टॉप पर ऐसे दिखाया जाता है कि उस पर नज़र ज़रूर पड़ती है । वह मालिक है अपनी साइट की , वह दिखा सकती है लेकिन क्या घटिया घटनाएं भी वह दिखाएगी ?
आज नज़र पड़ी तो वहाँ एक ऐसे ब्लॉगर का अपने दोस्तों की मंडली में अभिनंदन होते पाया जो 51 ब्लॉगर्स को छोड़कर बाक़ी सभी ब्लॉगर्स को सम्मान से वंचित करने का इतिहास रखता है । इसी आदमी के कारण भाई ख़ुशदीप जी को शर्मिन्दगी उठानी पड़ी । भाई ख़ुशदीप जी हमारी वाणी के एक पिलर हैं । उनके ही सिर पर ऐसे आदमी बिठाना निहायत घटिया हरकत है । इसके पीछे सिवाय ईनाम पाने की ख़्वाहिश के या चापलूसी के और कुछ भी नहीं है वर्ना अभिनंदन तो और ब्लॉगर्स के भी हुए हैं ।
क्या अब हमारी वाणी का स्तर इतना गिर चुका है कि वह 15-20 लोगों के हाथों मिलने वाली इज़्ज़त-ज़िल्लत की ख़बरें भी छापा करेगी और हिंदी ब्लॉगर्स को उन्हें पढ़ने के लिए मजबूर भी करेगी ?
ऐसी हरकतों के कारण ही लोगों का हिंदी ब्लॉगिंग से मोह भंग हो रहा है ।
हिंदी ब्लॉगिंग अभी अपनी शैशवावस्था में है । इसे व्यस्क होने से रोकने वाले यही अभिनंदनबाज़ हैं और इनके कुकर्म को हिंदी ब्लॉगिंग की सेवा बताने वाले हमारी वाणी जैसे चापलूस एग्रीगेटर भी इस जुर्म में बराबर के शरीक हैं।
हम हिंदी ब्लॉगिंग का स्तर घटिया बनाने का विरोध करते हैं और अपनी सदस्ता कैंसिल करते हैं ।
हमारी वाणी , कृप्या हमारे सभी ब्लॉग हटा दीजिए !
ताकि आपको याद रहे कि हमारे बीच सच कहने वाला एक ब्लॉगर अभी ज़िंदा हैं । अगर कोई और भी है तो वह भी विरोध करे और आए हमारे साथ ।

16 comments:

Tarkeshwar Giri said...

aaiye ab apni wani bane hain

Tarkeshwar Giri said...

aaiye ab APNIVANI banate han.

DR. ANWER JAMAL said...

@ प्रबंधक हमारी वाणी ! ब्लॉग वाणी और चिठ्ठाजगत के सामने हमारी वाणी का क़द काफ़ी कम है । उन दोनों ने भी कभी अनवर जमाल की पोस्ट हटाने की जुर्रत नहीं की लेकिन आप आए दिन हमारी पोस्ट पर अपना हाथ साफ़ करते रहते हैं। जबकि हम केवल सच लिखते हैं । कोई सच आपके ख़िलाफ़ होगा तो आप उसे सुनेंगे नहीं क्या ?
अहसास की परतें की ताज़ा पोस्ट हटाकर आपने सच का गला घोंटने का काम किया है और फिर माफ़ी माँगना तो दूर आपने कोई सूचना तक भी नहीं दी । जिस सच को आप हिंदी ब्लॉगर्स तक पहुँचने से रोकना चाहते हैं वह रूकेगा नहीं बल्कि अब हम इस लेख के लिंक ईमेल से भेज देंगे जो कि अभी तक करने का इरादा नहीं था ।
आप तुरंत हमारा अकाउंट अपने सम्मानित एग्रीगेटर से हटाएं या फिर लिखित में माफ़ी माँगे ।
बिना देर किए ।

एस.एम.मासूम said...

किसी भी अच्छी चीज़ का जब दुरुपयोग होता है तो वह और भी खतरनाक होती है. तात्पर्य यह है कि जब ब्लोगिंग का प्रयोग खुद या खुद से जुड़े लोगो के फायदे के लिए किया जाएगा तब यह अपने निम्नस्तर पर पहुचेगा और जब इसका सामूहिक हित के आधार पर प्रयोग होगा तो ब्लोगिंग शैशवावस्था से युवावस्था की तरफ अग्रसर होगा.

किसने कही इतनी इमानदार बातें देखें
हिंदी ब्लॉगजगत को निम्नस्तरीय ब्लोगिंग का लगा नशा

Khushdeep Sehgal said...

अनवर भाई,
आपको हमारीवाणी को लेकर कुछ ग़लतफ़हमी हो गई लगती है...मार्गदर्शक मंडल का सदस्य होने के नाते मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि यहां बिना कोई ख़ास वजह कभी किसी पोस्ट या ब्लॉग के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की जाती...हमारीवाणी पर शिकायत के लिए बाकायदा लिंक भी बना हुआ है...अगर वहां कोई शिकायत आती है तो संचालक-समूह की तरफ़ से विचार करने के लिए उसे मार्गदर्शक मंडल के हर सदस्य के पास भेजा जाता है...जहां बहुमत के आधार पर फ़ैसला किया जाता है...

रही बात सम्मान पर किसी पोस्ट विशेष की तो वो तो सामूहिक ब्लॉग समेत कई ब्लॉगों पर दिख रही है...सामूहिक ब्लॉग पर किसी भी सदस्य को पोस्ट करने का अधिकार होता है...इसमें कोई खास ऐतराज़ की बात नहीं है...

रही बात, मेरे ऊपर, आगे, बाएं, दाएं कोई भी पोस्ट रहे, मुझे कोई आपत्ति नहीं...

आपकी दो-तीन पोस्ट में मुझे वो तल्ख़ी का हल्का सा अंश दिखाई दे रहा है, जिससे आप बड़ी मुश्किल से बचना सीखे है...

खुद अच्छा लिखिए, अच्छा रहिए...बाक़ी सब ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दीजिए...

जय हिंद...

शालिनी कौशिक said...

dr.saab aapke kahne par hi ham yahan jude hain yadi aap kahenge to ham abhi hi apna blog vahan se hata lenge.ab bataiye kya karna hai?

हमारीवाणी said...

अनवर जमाल जी,

आपकी या किसी भी ब्लोगर की ब्लॉग-पोस्ट को हटाना हमारीवाणी के अधिकार क्षेत्र में आता है, अधिक जानकारी के लिए आप हमारीवाणी दिशा निर्देश पढ़ सकते हैं. हमारीवाणी ई-पत्रिका में क्या प्रकाशित होना है, यह पत्रिका के संपादक मंडल का अधिकार क्षेत्र है. अगर आपको कोई लेख पसंद नहीं आता है तो आप उसे नहीं पढ़ें या शालीन भाषा में अपनी आपत्ति उक्त लेख में व्यक्त कर सकते हैं.

हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए ब्लॉग पर लगे क्लिक कोड (लोगो) पर क्लिक करना आवश्यक होता है, इसलिए अगर आप अपने ब्लोग्स हटाना चाहते तो अपने ब्लोग्स पर से हमारीवाणी के लोगो को हटा दें, इससे आपकी पोस्ट हमारीवाणी पर प्रकाशित होना बंद हो जाएंगी. साथ ही इसके लिए आप मुख्य प्रष्ट पर लिखे 'संपर्क करें' पर क्लिक करके ब्लोग्स हटाने का अनुरोध भी कर सकते हैं, आपकी इच्छानुसार हमारीवाणी से आपके सभी ब्लोग्स हटा दिए जाएँगे.

वैसे आपनी इस इच्छा के बाद भी आपने अपनी नई पोस्ट हमारीवाणी पर प्रकाशित कर दी है.

टीम हमारीवाणी

DR. ANWER JAMAL said...

हमारी वाणी ! किसी भी पोस्ट को हटाना आपके अधिकार क्षेत्र में तभी आता है जबकि उसमें कोई ग़लत या अश्लील बात लिखी हो लेकिन महज़ सच के कड़वा होने और अपनी पोल खुलने के डर से पोस्ट हटाना हमारी वाणी तो क्या किसी भी एग्रीगेटर के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसी का नाम तो ‘पीत पत्रकारिता‘ और ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटना‘ है। हमारी वाणी यही काम कर रही है। हमारी वाणी का यही काम हिंदी ब्लॉगिंग का स्तर दिन प्रतिदिन घटाता जा रहा है।
आपके द्वारा अपनी ग़लती के लिए माफ़ी न मांगना यही बताता है कि न तो आपमें सच को सहन करने की ताक़त है और न अपनी ग़लती क़ुबूल करने का हौसला।
हमारा अकाउंट आपने ही बनाया था इसलिए आपके कर कमलों द्वारा हटाया जाना ही उचित है।
‘ग़द्दारों की जमात ; एक ज्वलंत समस्या‘ , इस पोस्ट को हमने आपकी वाणी पर इसीलिए पब्लिश की ताकि आप हमारा अकाउंट एक झटके में ही ख़ारिज कर दें क्योंकि हम जानते हैं कि सच को आप सहन कर नहीं सकते। इस एग्रीगेटर से हटने बाद भी सच को लाया ही जाएगा।
अब आप हैं और आपकी वाणी। बुनियाद की ईंटें सरक चुकी हैं। अब संभालिए अपनी इमारत। मालिक आपको महफ़ूज़ रखे।
आमीन !
ख़ुदा हाफिज़ !!

सलीम ख़ान said...

ZARA HAMARIVANI.COM KE MALIK SE PUCHHO KI ISKA NAAMKARAN KISNE KIYA THA

ARE JISNE PAIDA KIYA USKO HI BHOOL GAYE........

WAQT KE SAATH-SAATH PATA CHALREGA...!

KAUN APNA HAI AUR KAUMN PARAYA...!

एस.एम.मासूम said...

अनवर जमाल साहब ना मालूम हमारीवाणी कि तरफ से आप को क्या ग़लतफ़हमी हुई है. लेकिन आप यदि सही हैं तो जैसा दिशा निर्देश है और खुशदीप साहब ने भी कहा कि आप हमारीवाणी के शिकायत वाले लिंक से अपनी शिकायत क्यों नहीं भेजते? वहाँ से आप कि कोई शिकायत नहीं आयी और आप यहाँ हमारीवाणी से अपनी नाराज़गी प्रकट कर रहे हैं.

मार्गदर्शक मंडल का सदस्य होने के नाते मैं आपसे निवेदन करूँगा कि आप अपनी शिकायत इस लिंक पे करें.
http://hamarivani.com/contact_us.php
जिस से संचालक-समूह उसे मार्गदर्शक मंडल को भेजे और बहुमत के आधार पर फ़ैसला लिया जाए.
उस फैसले को आप को मानना होगा . आशा है आप बात को समझेंगे.

अविनाश वाचस्पति said...

मेरे विचार से सब अपनी तरह से अपना अपना काम करते जाएं। किसी के करे हुए को तोलें मत, जो कर रहा है, उसे करने दें। किसी पर रोक नहीं लगाएं, न खुद ही रुकें। एक दिन अच्‍छाई का साम्राज्‍य होगा और बुराई, वह भी रहेगी ही, क्‍योंकि बुराई के बिना अच्‍छाई की पहचान हो ही नहीं सकती। दोनों ही अनिवार्यता हैं।

DR. ANWER JAMAL said...

@ आदरणीय भाई ख़ुशदीप जी ! आपने मेरे लहजे में तल्ख़ी बिल्कुल सही महसूस की है और उसकी वजह है हमारी वाणी की ग़ैर-ज़िम्मेदाराना हरकतें। आप कह रहे हैं कि
.हमारीवाणी पर शिकायत के लिए बाकायदा लिंक भी बना हुआ है...अगर वहां कोई शिकायत आती है तो संचालक-समूह की तरफ़ से विचार करने के लिए उसे मार्गदर्शक मंडल के हर सदस्य के पास भेजा जाता है...जहां बहुमत के आधार पर फ़ैसला किया जाता है...
1- अगर आपकी बात सही है तो फिर आपको क्यों नहीं पता है कि मैंने इसी लिंक पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज की थी ?
2- मेरी शिकायत को मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों के साथ आपको फ़ॉरवर्ड क्यों नहीं किया गया ?
3- आपकी टिप्पणी के नीचे हमारी वाणी टीम के नाम से कोई मुझसे कह रहा है कि आपके ब्लॉग हमारी वाणी से हटा दिए जाएंगे। क्या मेरे ब्लॉग को हटाने से पहले मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों की राय ली गई है ?
आपकी टिप्पणी से साफ़ ज़ाहिर है कि आपकी जानकारी में न तो मेरी शिकायत लाई गई और न ही उस पर आपकी कोई राय ली गई और मुझे लगता है कि शायद अन्य सदस्यों को भी इसी तरह ‘किसी‘ ने अंधेरे में रखा हुआ है। वह आपका पैसा और आपके नाम की साख तो इस्तेमाल कर रहा है लेकिन महत्वपूर्ण फ़ैसलों में वह आपको कोई अहमियत नहीं देता।
वह कौन है ?
इसे आप तलाश कीजिए। मैं तो जान ही चुका हूं।
मुझे हमारी वाणी के इसी ग़ैर-ज़िम्मेदार रवैय्ये से शिकायत है। इतना ही नहीं बल्कि बात इससे भी ज़्यादा गहरी है जो कि क्रमवार मेरी पोस्ट्स के ज़रिये आपके सामने आती चली जाएगी। भ्रष्ट और बेईमान लोगों से शराफ़त का नक़ाब उतारने के लिए ही तो अनवर जमाल यहां आया है। इस काम में मैं अपने पराये का कोई भेद नहीं करता। यह बात भी दुनिया जानती पहले से है अब फिर देख लेगी।
मैं आपकी सच्चाई और ईमानदारी की वजह से आपसे प्यार करता हूं और आज भी और आगे भी आपकी नेक सलाह का सदा स्वागत करता हूं।
धन्यवाद !
नोट- हमारी वाणी के विशेष लिंक पर मैंने जो शिकायत की थी और हमारी वाणी की ओर से मुझे जो ईमेल भेजी गई है उसे मैं आपको फ़ॉरवर्ड कर रहा हूं।

DR. ANWER JAMAL said...

@ जनाब मासूम साहब ! आप तो वाक़ई मासूम हैं। आप नहीं जानते कि ब्लॉगजगत में कितनी गंदी राजनीति चल रही है। आप भी मुझसे वही बात दोहरा रहे हैं जो कि भाई ख़ुशदीप जी कह रहे हैं। मैं आपसे भी यही कहता हूं कि मैंने आपके द्वारा दिए जा रहे लिंक पर ही अपनी शिकायत दर्ज की थी और उस शिकायत पर मुझे जवाब भी मिला था और एक बार नहीं बल्कि कई बार जवाब आया लेकिन न तो भाई ख़ुशदीप यह प्रकरण जानते हैं और न ही आप। इसका साफ़ मतलब यह है कि कोई आदमी जो ईमेल चेक करता है, वह आपको महज़ एक डमी की तरह इस्तेमाल कर रहा है। कहने के लिए यह है कि एक मार्गदर्शक मंडल है और किसी भी शिकायत या विवाद को उसके सदस्यों के सामने रखा जाता है लेकिन हक़ीक़त यह है कि कोई एक या एक-दो व्यक्ति ख़ुद ही सारे फ़ैसले कर रहा है। हमारी वाणी की बुनियाद हमने रखी थी, इसलिए इसे बर्बाद होते देखकर दुख होता है।
हमारी वाणी का मार्गदर्शक मंडल महज़ एक दिखावटी मुखौटा है। ख़ुशदीप भाई और आपकी टिप्पणियों से यह बात पूरी तरह सिद्ध हो चुकी है और यही भ्रष्टाचार है। हिंदी ब्लॉग जगत में मैं अपने सामने यह भ्रष्टाचार हरगिज़ पनपने नहीं दूंगा। यह मैं साफ़ कर देना चाहता हूं।
मेरे रोज़गार पर हमले की धमकी बड़े साहित्यिक अंदाज़ में दी जा रही है लेकिन मैं इस मिली-भगत के मुजरिमों को बताऊंगा कि अभी उन्हें पूरा अंदाज़ा नहीं है कि अनवर जमाल कौन और क्या है ?
बहरहाल, मैं तो यही कहूंगा कि हमारी वाणी को आपकी राय की कोई ज़रूरत तो है नहीं तब आप ख़ामख्वाह क्यों कह रहे हैं कि यहां शिकायतों का निस्तारण बहुमत के आधार पर होता है ?
आप अपना ‘अमन का पैग़ाम‘ देखिए और इन्हें मेरे लिए छोड़ दीजिए। मैं देखता हूं इनकी शिकायतों को भी और इनका निस्तारण करने के लिए भी मैं अकेला ही काफ़ी हूं, इंशा अल्लाह !
हमारी वाणी की एडमिन पॉवर पहले मेरे , सलीम ख़ान के और जनाब उमर कैरानवी साहब के पास थी। हमने इसे जमाया और यहां तक लाये। जब दुकान चल निकली तो सलीम ख़ान को भी बाहर कर दिया गया और अब मुझे भी कर दिया जाएगा। जो आदमी अपने साथियों का, अपनी बिरादरी का नहीं हुआ वह किसी ख़ुशदीप का क्या होगा ?
वह आपका ही क्या होगा ?
मैं एक क़स्बे का रहने वाला आदमी हूं। घुमा फिरा कर गोलमोल बात कहना मुझे आता नहीं और मैं चाहता भी नहीं कि ऐसी कलाकारी मैं करूं। मेरा हर लफ़्ज़ साफ़ है और आप इसे समझ सकते हैं।

एस.एम.मासूम said...

अनवर जमाल साहब मैं अपने मशविरे को वापस लेता हूँ.

किलर झपाटा said...

जमाल मियाँ, मेरा बस चले तो एक झपाटे में ही हमारीवाणी की सारी धूल झाड़ दूँ मगर क्या करूँ मेरा तो ट्रक चलता है यार। ही ही। यू आर राइट।

किलर झपाटा said...

सलीम मियाँ आप पूछ रहे थे ना, कि कौन अपना और कौन पराया ?
इस पहेली का आन्सर है:-
दिल अपना और प्रीत पराई।
ही ही