Thursday, September 30, 2010

Anam, in our hearts आंखें बंद थीं तो गोद में अनम थी - Anwer Jamal

आंखें बंद थीं तो गोद में अनम थी
आंख खुली तो आंखें नम थीं
2 अगस्त 2010 की सुबह को आंख खोलते ही मुझे अपनी वाइफ़ से यह सुनने को मिला। मुझे लगा कि वे शयद कोई sher  सुना रही हैं लेकिन वे मुझे अपने ख्वाब के बारे में बता रही थीं जो उन्होंने उस रात देखा था।
वे मुझसे अक्सर कहती थीं कि इतने दिन हो गये अनम मेरे ख्वाब में नहीं आई क्या उसे ख्वाब में देखने कोई तरीक़ा नहीं है ?
है क्यों नहीं ? आप दुआ कीजिए, अल्लाह आपको उसे दिखा देगा। -मैंने कहा।
दुआ कैसे करूं ?
‘या ख़बीरू अख़बिर्नी‘ यानि ऐ हर चीज़ से बाख़बर मुझे ख़बर दीजिए। आप इस दुआ को ज़बान से अदा कीजिये और अपने मन में इरादा कीजिये अनम को देखने का। किसी से बात मत कीजिए और इस दुआ को पढ़ते-पढ़ते सो जाईये। उन्होंने दो दिन ऐसे ही किया और दूसरे ही दिन उन्हें सपने में अनम नज़र आ गई।
उन्होंने बताया कि पहले मैं डाक्टर कान्ता के नर्सिंग होम में अनम को रोते हुए ढूंढ रही थी जबकि घरवाले हंस बोल रहे थे। मुझे यह भी लगा कि अब अनम होने वाली है और मैं कान्ता से पूछ भी रही हूं कि आपने अनम को देखा है क्या और मैं रो भी रही हूं तभी मैंने अनम को अपनी गोद में और अच्छी सेहत में देखा। उन्होंने बताया कि मैं ख्वाब में भी रो रही थी यह सोचकर कि अनम मुझसे जुदा हो चुकी है। इसी दरम्यान मेरी आंख खुल गई और मेरी आंखें नम थीं और मेरा
दिल और ज़्यादा फूट-फूटकर रोने के लिए चाह रहा था।
अनस ने भी अपनी बहन अनम को देखा।
उसने देखा कि सामने एक बड़ा सा लोहे का दरवाज़ा है उसमें अनस ने एक लात मारी तो दरवाज़ा खुल गया। वहां पर सामने फूलों के ज़ीने पर एक बुज़ुर्ग बैठे हुए थे जिन्होंने सफ़ेद लिबास पहन रखा था और उनके सामने हवा में एक प्लेट थी जिसमें भुना हुआ मुर्ग़ा रखा हुआ था। फिर जब उन्होंने मुर्ग़ा खा लिया तो बचा हुआ मुर्ग़ा सही सलामत होकर हवा में उड़ गया और अनस यह सोचने लगा कि मुर्ग़ा तो हवा में इतना ऊँचा नहीं उड़ता। यह कैसा मुर्ग़ा है ?
फिर अनस ने अनम को ढूंढना शुरू किया ताक अनम उसे नहीं दिखी। फिर अनस ने आवाज़ दी ‘अनम तुम कहां हो ?‘
फिर अनस ने उन बुजुर्ग से पूछा कि ‘क्या आपने अनम को कहीं देखा है ?‘
उन्होंने अपने हाथ के इशारा किया और कहा कि देखो वह सामने खेल रही है अनम।
अनस ने बताया कि
मैंने उसे देखा तो अनम बहुत सारे बच्चों में से निकलकर मेरे पास भागी हुई आई। अनम ने और सभी बच्चों ने सफ़ेद लिबास पहन रखा था। फिर मैंने अनम को गोद में लेने के लिए हाथ उठाये और पूछा -‘अनम तुम्हें दूध चाहिये ?‘
अनम बोली -‘जी‘
तब मैंने अनम को पालने में लिटाया और उसे बोतल से दूध पिलाया । उसके बाद अनस अनम को गादे में लेकर चलने लगा। एकदम से अनस को झटका लगा तो दोनों नीचे गिर पड़े और अनम अनम की गोद में थी। जब अनस ने खड़े होकर देखा तो वह हवाई क़ालीन पर उड़ रहा था। अनम ने अनस को दिखाईं, शहद की, कटहल के बीज की, अख़रोट की, बादाम की।
अनस अनम को लेकर कटहल की नदी में कूद पड़ा और दोनों ने कटहल के बड़े-बड़े बीज खाये।
अनस अनम को लेकर बाहर आया तो एकदम से उड़ने वाला क़ालीन आ गया। अनम ने अनस को ऊपर खींच लिया और उड़ते-उड़ते दोनों एक बड़े से गेट पर आकर रूक गए। इस गेट पर अंग्रेज़ी में लिखा था ‘चिल्ड्रन्स हैवन‘। उर्दू या अरबी में भी कुछ लिखा हुआ था।
फिर अनम ने अनस से पूछा कि ‘भाई साहब, मैं बच्चों के पास जाऊँ ?‘
अनस ने कहा -‘जी‘
अनम के जाते ही चारों तरफ़ सफ़ेद ही सफ़ेद और सन्नाटा दिखाई देने लगा। एकदम अनस गड्ढे में गिर गया और झटका लगते ही उसकी आंख खुल गई।
यह ख्वाब अनस ने अपनी मां से पहले देखा।

4 comments:

विवेक सिंह said...

होनी को कौन टाल सका है ! धीरज रखना होगा ।

सतीश सक्सेना said...

याद न करें तो अच्छा होगा ...जितना याद करेंगे कष्ट बढेगा ही ! तसल्ली रखिये ...

Mahak said...

@आदरणीय,प्रिय एवं गुरुतुल्य अनवर जी

वैसे तो मैं सपनों में घटित बातों को सत्य नहीं मानता लेकिन इस स्वप्न से मुझे लगता है की ईश्वर ने आपको एक सन्देश भेजा है की अनम जहाँ भी है वो उस परमपिता परमात्मा की गोद में हँसती-खेलती बहुत खुश है ,उसकी यादें हम सभी के दिल में हमेशा रहेंगी

अनस और भाभी जी का खैयाल रखें

महक

S.M.MAsum said...

अनवर भाई सब्र इंसान को करना पड़ता है. कर्बला मैं इमाम हुसैन (अ.स) के ६ महीने के बच्चे को प्यासा तीर मार के, बाप कि गोद मैं शहीद कर दिया. ज़रा सोंचें कैसे सब्र किया होगा? आप भी सब्र करें और अल्लाह से दुआ करें.