Thursday, September 1, 2011

अखंड भारत को तोड़ने वाले मुजरिम कौन ?

ब्लॉगिंग के माध्यम से हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि दिलों को जोड़ने की कोशिश की जानी चाहिए। दिल जुड़ेंगे तो हम जुड़ेंगे और भारत सशक्त होगा। मज़बूत भारत एशिया को नेतृत्व देगा तो इसका रूतबा विश्व में ऊंचा होगा और त यह अपने आस पास के इलाक़ों को एक महासंघ का रूप देकर अपने खोये हुए टुकड़ों को वापस पा सकता है और यह काम आपसी विश्वास और आपसी प्रेम से ही होगा क्योंकि एशिया में मुलमानों बड़ी आबादी है, सो न तो आप इन्हें नज़र अंदाज़ कर सकते हैं और न ही नज़रअंदाज़ करके कभी सफल हो सकते हैं।
इसके बावजूद कुछ शरारती तत्व ऐसे भी हैं जो कि न सिर्फ़ मुसलमानों को नज़रअंदाज़ करते हैं बल्कि वे मुसलमानों को देश बांटने का दोषी बताकर ग़ददार भी कह देते हैं और क़ुरआन पर भी ऐतराज़ कर देते हैं।
क्या यह कोई सही तरीक़ा है ?
क्या हम आपके धर्म में कोई कमी बता रहे हैं ?
नहीं !
इसके बावजूद भी हमारे साथ छेड़ख़ानी क्यों की जा रही है ?
जो हमारे जलाल को नहीं जानता वह ब्लॉगर डॉट के किसी भी वरिष्ठ ब्लॉगर से हमारे बारे में पता कर ले कि हम कौन हैं और हमारे सामने आपके ऐतराज़ यूं ही आते रहे तो फिर हम क्या करेंगे ?
हमें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है।
पचास से ज़्यादा ब्लॉग्स और वेबसाइट्स पर सैकड़ों लेख हमारे अपने लिखे हुए तैयार पड़े हैं, उन्हें यहां डालना शुरू कर देंगे।
फिर सबके हाथों से तोते उड़ जाएंगे।
अब से दो पोस्ट पहले एक भाई ने इसी तरह देश के बंटवारे आदि को लेकर हम पर ऐतराज़ जड़ दिया।
हमने उन्हें जवाब जवाब देते हुए कहा कि
आपने सुना होगा कि कभी मलेशिया और अफ़ग़ानिस्तान भी अखंड भारत का ही हिस्सा थे लेकिन जब मुसलमान भारत आए भी नहीं थे। उससे पहले ही हिंदुओं ने अखंड भारत के हज़ारों छोटे छोटे टुकड़े कर दिए थे।
क्या आपने कभी उन हज़ारों राजाओं और उनके लाखों हिंदू सैनिकों को ग़ददार कहा है ?
नफ़रत की बोली बोलने से आप केवल नफ़रत फैला सकते हैं लेकिन किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकते।
जो आदमी ख़ुद ग़ददार हो उसे क्या हक़ है कि वह दूसरों को वही काम करने पर ग़ददार कहे जो कि अपने प्यारे पूर्वज करते आए हैं।

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

chintniy v gambheer post.
फांसी और वैधानिक स्थिति

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" said...

anvar bhaia sahi or stik sval uthaya hai .akhtar khan akela kota rajsthan

रविकर said...

अच्छी प्रस्तुति |
बहुत-बहुत बधाई ||

Sanjeev said...

Akhand bharat was not a country ruled by a single emperor but was a combination of several states rules by different kings. Since they were having single or similar religious faith, they never got involved in destruction of temples or universities. It was only when the "outsiders" invaded parts of bharat, they being from a separate religion got involved in destruction of hindu mandirs and other important places like universities,monuments etc.
Incidentally they were all majorly muslims. These kings did not destroy any such thing in muslim ruled areas but only in non muslim areas. They were also involved in huge conversion of religion, the reult of which are today's Indian Muslims, who were hindus originally.We can not be held responsible for past acts. Simultaneously we can not justify wrong acts of past.