Wednesday, May 18, 2011

जो लोग भारतीय राष्ट्रवाद का दंभ भरते हैं और पाखंड रचते हैं, वे भी आज वृहत्तर भारत और अखंड भारत की हितचिंता से कोई सरोकार नहीं रखते और विदेशियों का साथ देते आसानी से देखे जा सकते हैं The main problem


डा. आशुतोष शुक्ला जी पूछ रहे हैं कि ‘ पाक में घुसकर ओसामा को मारने के बाद भी लगता है कि अमेरिका की आँखों से अभी भी पाक का चश्मा उतरा नहीं है क्योंकि वहां के रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आज भी पाक को दी जाने वाली सहायता में किसी भी तरह की कटौती के ख़िलाफ़ फिर से बोले हैं।‘
भाई अमेरिका की आंखों से कोई चश्मा तो तब उतरेगा जब कोई चश्मा उन पर चढ़ा हो। पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा है वह अमेरिकी डालर की मदद से और उसकी योजना के अनुसार ही हो रहा है। अमेरिका दरअस्ल पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहा है बल्कि वह अपनी योजनाओं को पूरा कर रहा है।
सऊदी अरब या पाकिस्तान, इनमें से अमेरिका किसी का भी दोस्त नहीं है। वह केवल अपना दोस्त है और अपना मतलब भी अपने नागरिकों की बहुसंख्या का नहीं बल्कि अमेरिकी पूंजीपति कंपनियों का, अमेरिका इन्हीं कंपनियों का हित साधने के लिए पूरे विश्व में धमाचैकड़ी मचाए हुए है और किसी भी कमज़ोर देश को उसके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं करने देना चाहता।
अपनी कंपनियों के हितों के लिए जो तबाही वह दुनिया में मचाए हुए है उसका विरोध विश्व बिरादरी के साथ ख़ुद उसके देश की जनता भी कर रही है लेकिन वह सुनता ही नहीं है। अमेरिका पर शासन करने वाले पब्लिक के वोटों से चुने जाते हैं लेकिन वे पूंजीपती कंपनियों के हितों के लिए ही अपनी अंतर्राष्ट्रीय नीतियां बनाते हैं और ‘शांति और न्याय‘ के नाम पर मुल्कों पर बम बरसाते हैं।
अमेरिका ने आज तक जिस देश को भी अपना दोस्त बनाया, उसे या तो ग़ुलाम बनाया या अगर उसने आज़ादी की कोशिश की तो उसे तबाह कर डाला। पाकिस्तान आज तबाह हो रहा है तो यह अमेरिका की दोस्ती का अंजाम ही है।
अमेरिका भी यह बात जानता है कि धीरे-धीरे पाकिस्तान ख़ुद ही तबाह हो जाएगा लेकिन तब तक उसे अपने हित भी साधने हैं।
हालांकि सोवियत संघ का विखंडन होने के बाद हमारे नेता भी अमेरिका के दोस्त बन गए हैं और बार-बार कह रहे हैं कि ‘अजी, आप पाकिस्तान को छोड़िए, हमें मदद दीजिए और हमारे अड्डों को इस्तेमाल कीजिए‘
अमेरिका की दोस्ती में तबाह होते हुए पाकिस्तान को देखकर भी यह कहा जा रहा है ?
हैरत है!
मामूली सी बातें लोग समझते नहीं या फिर पाकिस्तान की नफ़रत में समझना नहीं चाहते। अमेरिका और इस्राईल की दोस्ती में आज तक किसी एशियाई देश को कुछ तरक्की नसीब हुई हो तो वह हमें बताए ?
चश्मा अमेरिका की आंखों पर नहीं है बल्कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के लोगों और उनके नेताओं की आंखों पर है, नफ़रत का।
इसी नफ़रत के कारण आज विदेशी ताक़तें ठीक उसी तरह वृहत्तर भारत को तबाह कर रही हैं जैसे कि पूर्व में बार-बार कर चुकी हैं।
जो लोग भारतीय राष्ट्रवाद का दंभ भरते हैं और पाखंड रचते हैं, वे भी आज वृहत्तर भारत और अखंड भारत की हितचिंता से कोई सरोकार नहीं रखते और विदेशियों का साथ देते आसानी से देखे जा सकते हैं।
दुःखद है यह सब होते देखना।

10 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

चश्मा अमेरिका की आंखों पर नहीं है बल्कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के लोगों और उनके नेताओं की आंखों पर है, नफ़रत का।
इसी नफ़रत के कारण आज विदेशी ताक़तें ठीक उसी तरह वृहत्तर भारत को तबाह कर रही हैं जैसे कि पूर्व में बार-बार कर चुकी हैं।
जो लोग भारतीय राष्ट्रवाद का दंभ भरते हैं और पाखंड रचते हैं, वे भी आज वृहत्तर भारत और अखंड भारत की हितचिंता से कोई सरोकार नहीं रखते और विदेशियों का साथ देते आसानी से देखे जा सकते हैं।
दुःखद है यह सब होते देखना।
--
वाह-वाह..!
कमाल का आलेख लिखा है!
हकीकत बयान कर दी!
अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है
अगर हम लोग और वो लोग समझ जाएँ तो!

Neelam said...

kash hum wqt rehte samjh paayen.. iss se pehle ki halaat bad se badtar ho hume samjhna hoga..aaur jahan tak angrezon ki baat haai to unka to shuru se ek hi tareeka raha hai ..Fooot daalo aur shaashan karo..aur wo aj bhi yahi kar rahe hain.
Anwer ji daad deni padegi apki soch apke zazbe ki.

Bhushan said...
This comment has been removed by the author.
Bhushan said...

शासन कहीं भी किया जाए फूट डाल कर ही किया जाता है.
जहाँ तक अमरीका का सवाल है, उसकी नीतियों का निर्माण दीर्घावधि आधार पर होता है. पढ़े-लिखों का देश है इसलिए देखता है कि सौ साल बाद कौन सी चीज़ कैसे हासिल होगी - जैसे तेल, सोलर एनर्जी, नई ज़मीन, मौसम, सस्ता श्रम आदि.

महेश बारमाटे "माही" said...

Sahi kaha Anwar ji aapne...

ye hindustani neta, inko america ki dosti ya to khud ke laabh ke karan achchi lag rhi hai yaa darte hain ki kahin uski dosti thukra di to hme tabah na kar dale...

arre kabhi bhagat singh, netaji subhash chandra bos ya indira gandhi ki tarah socha hota to samajh me aata ki apna hak sirf lad kar jeeta ja skta hai... darr kar nahi..

Dr. Ayaz Ahmad said...

सही आकलन

Zafar said...

An eye opening writeup indeed.
I salute your great efforts for the betterment of our society and pray to God for make a large number of people to understand these basic and naked truths of our lives and the world arround us.

Zafar said...

Respected Dr. Sb.
An eye opening writeup indeed.
I salute your great efforts for the betterment of our society and pray to God to make a large number of people to understand these basic and naked truths of our lives and the world arround us.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

इस आलेख की हर बात से सहमति है।

DR. ANWER JAMAL said...

@ आदरणीय वकील साहब ! आपकी सहमति के लिए शुक्रिया !
यह एक यादगार टिप्पणी है !